Wednesday, December 6, 2017

तीर

यूँ ही
कैसे
ले लेता
जान
तीर उनका
ज़हर बुझा,

एक सीना
भी तो
दरकार था
जो मैंने
दिया नहीं...

Tuesday, December 5, 2017

इजाज़त

बड़ी नफ़ासत से
सम्भल सम्भल कर
निज़ाम ने थी
जाने दी
उनकी जान,

इतने मकबूल थे वो
कि उन्हें 
मरने की
इजाज़त न थी।

Monday, November 20, 2017

घड़ा

इंसान...
ईश्वर का बनाया
वो घड़ा
जो
कुम्हार बन गया।

Saturday, November 11, 2017

पृथ्वीराज

सोचा था
सुकून से होंगे
पृथ्वीराज चौहान
इस इत्मिनान में
कि रह सकेंगे वो
दिल्ली में
हमेशा
अपने नाम की सड़क पर,
औरंगज़ेब की तरह
बेघर न होंगे,

मगर नहीं।

हैं वो
बेचैन
उस सोच से
जो बह सकती है
अन बीते इतिहास में
कभी फिर
उलट!

संशय

हाँ,
तू है
ऐसा
रोज़ कहता हूँ मैं,

हाँ,
फिर
संशय में
यतीम सा
रहता हूँ मैं!

Wednesday, November 8, 2017

ਕੱਤਕ

ਕਰਤਾਰ ਦੀ ਕੱਤਕ
ਕਰਤਾਰ ਦੀ ਵਸਾਖ,
ਨਿਮਾਣੇ ਦਾ ਪਿਆਰ
ਸਿਆਣੇ ਦੀ ਸਾਖ।

Tuesday, October 31, 2017

ਦੀਵਾ

ਹਰ ਝੱੜ ਸੰਸਾਰ ਦਾ
ਵਿਚ ਦੀਵਾ ਸੋਹਣੇ ਯਾਰ ਦਾ
ਵਰਤਾਰਾ ਉਸ ਕਰਤਾਰ ਦਾ!

Saturday, October 21, 2017

ਪਰਛਾਈਂ

ਡੁੱਲੀ ਸਿਆਹੀ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ
ਇਕ ਛੋਟੇ ਗੋਲ ਤਲਾਬ ਵਾਂਗੂੰ
ਤੇਰੇ ਪੈਰਾਂ ਚ ਪਈ ਸੀ
ਓਸ ਵੇਲੇ
ਤੇਰੀ ਪਰਛਾਈਂ
ਮੈਂ ਵੇਖਿਆ,

ਲਾਹ ਸੁੱਟੀ ਸੀ ਤੂੰ
ਲਤਾੜ ਕੇ
ਯਾ ਆਪਣੀ ਹੀ ਨਜ਼ਰਾਂ ਵਿਚ ਸੀ
ਢਹ ਗਈ?

ਯਾ ਸੀ ਤੂੰ
ਸੋਚਾਂ ਵਿਚ ਮੁਸਲਸਲ ਬਦਲ ਰੇਹਾ,
ਤੇ ਓ ਸੀ
ਬੈਠੀ ਆਪਣੀ ਹੀ ਪਰਛਾਈਂ ਚ
ਉਡੀਕਦੀ ਤੈਨੂੰ
ਪਹੁੰਚਣ ਦੇ ਕਿਸੇ ਨਿਸ਼ਕਰਸ਼ ਤੇ...

Tuesday, October 3, 2017

हरे ज़ख़्म

कहीं
अभी भी होंगे
मुझमें
ज़रूर
कुछ हरे ज़ख़्म
जो मेरी निगाह में नहीं,

बहती है जो
बात बात पर
मेरी सोच में
इतनी मवाद
जो नीयत ए ख़ैर ख़्वाह
में नहीं...

गाँधी

जब भी दिखता है गाँधी
कभी बेन किंग्स्ले
कभी गोडसे
कभी पटेल नेहरु बोस
कभी अम्बेडकर
दिखता है,

भरा है विषाक्त विरोध से
किस क़दर मेरा ज़हन,
दिखता नहीं
हाड मास के निश्चय का निडर हौसला
जो बार बार
मेरी ही दरारों में कहीं छिपता है!