Wednesday, December 28, 2016

आरे

आपणी
तरजणी
ते अँगूठे नाल
कदी मेरे बुल्लाँ ते
हासा ताँ लेआ,

तजुर्बेयाँ
खत्तेयाँ
दी चपेडाँ दी थाँ,
आपणे पोले पोटे
मेरी सुक्कियाँ गल्लाँ नूँ ला
मेरे पिता परमेश्वर,
मेरे हँजू ताँ पुंज,
किसे आरे ताँ ला!

कहीं और

अब कहाँ
रातों रात
इंद्रधनुष
अपने रंग बदले,

आसमान से कहो
कि सूरज को कहे
कि बादलों से कहे
कि कहीं और
बरसें!

चलो

चलो चलकर
कोई ज़िन्दगी
बचायें,

ख़ून ए पाक़ से
खेलकर
नहायेंगे
कहाँ कहाँ!

कुछ और

खेलते हैं
नाती संग
आप
पर
खुश कुछ और तो होइए!

ये आप ही हैं
तैयार
जीने को
मरने के बाद!

एक अक्षर

फड़फड़ाती
पताकाओं वाले "है" से
इति के स्तम्भ वाला "था"!

एक अक्षर से भी क्षीण निकली
तेरी वजूद की गाथा।

Tuesday, December 27, 2016

सड़क

"आ जाओ माँ,कोई गाड़ी नहीं आ रही,सड़क क्रॉस कर सकते हैं!" -
नेत्रहीन माँ का दायाँ हाथ पकड़े
पाँच साल का बेटा बोला,

"हाँ, हाँ माँ कोई गाड़ी नहीं आ रही, भऊ भऊ!" -
माँ के बायें हाथ से रस्सी में बंधा
नन्हा मोती भी इधर उधर देखकर बोला...

Friday, December 23, 2016

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