Monday, March 13, 2017

दूसरा किनारा

8 घण्टे दी नींद
जिवें 5 कु मिनटाँ च लै के
मैं फ़्री सी!
मौत नालों ए डीप स्लीप
अलेहदा
ख़ौरे किवें सी?

होवेगी
बेशक़
इक दे उस पार
कोई नवीं दुनिया,
दूसरे दे किनारे वी ताँ
इक अनदेखी सवेर सी!

Saturday, March 11, 2017

व्यापार

एम बी ए!

व्यापार करेगा?

मुफ़्त में बेचेगा
क्रोध
या
मंहगे में देगा?

Friday, March 10, 2017

शुक्रिया

तेरे धोख़े का
शुक्रिया,

कीमती सबक
बहुत कम में मिला!

Monday, March 6, 2017

टिफ़न

चढ़ी दोपहर
स्कूल में
खोलते हैं जब
टिफ़न
बच्चे,
बंधा पाते हैं
फिर
सुकून की सुबह का
ताज़ा टुकड़ा,

माँ वालों
के नित में
सूरज कई बार है चढ़ता।

Saturday, March 4, 2017

आराम

लो यहाँ अपने सफ़र को
देता हूँ विराम,
थक कर चूर मगर बेहद ख़ुश
रूह को आराम देता हूँ,

कह देना ज़माने को
बड़ा शुक्रगुज़ार था मैं,
उसके हर मन्ज़र को
तहे दिल से सलाम करता हूँ,

था मैं अलबत्ता
किसी और मिट्टी का,
सो इस मिट्टी को वापस बा अदब
साज़ ओ सामान करता हूँ!

महफ़िल

हो
एक ऐसी भी महफ़िल
जहाँ
न शम्मा, न परवाना हो,

पिघल पिघल के
जले
मेरा ही वजूद,
तेरी ही रूह को
नज़ारा हो!

समन्दर

मोतियों के समन्दर में
रखना आँसू सम्भाल के,
खो जाओ जो किसी रोज़
तो इनमें ही मिलोगे!