Friday, September 23, 2016

रंग

रोम रोम पर तेरे
क्या ग़ज़ब
हिना का रंग,

जैसे
ब्याही हो रूह
अपने भाग्य के संग!

प्यास

बुझा तो दूँ
तेरी प्यास
मगर
पानी
खारा
पिलाऊँ
कैसे?

तेरी नज़र
है जो
मेरी आँखों के प्यालों पर,
आँसुओं के जाम
बनाऊँ कैसे!

Thursday, September 22, 2016

बुक्कल

काग़ज़ी बुक्कल मार
चुप चुपीता बैठा सी ओ
चमड़े दियाँ दीवाराँ दे ओहले
लुक के
मार चौकड़ी,

मैं लभ के
जदों
"जा चला जा" केहा
ताँ बाज़ार जा
ख़ुद नूँ वेच
चा दा कप्प लै आया
वास्ते मेरे
मेरे दस्साँ दा
ओ पुराणा नोट।

Wednesday, September 21, 2016

दावतनामा

आपको
खून से लिखा
भेजेंगे दावतनामा
जब आपको
हम ख़ुद बुलायेंगे,

इसे
पैग़ाम ए जार* समझिये,
क़यामत को
कौन समझाये
हमारे दोस्त
हमारे कहे बिन
न आयेंगे।


*जार=पड़ोसी

Monday, September 19, 2016

तारिका

इतनी बड़ी
सिने तारिका
बम्बई से इतनी दूर
हिमाचल के दूर दराज़
गाँव आयेगी
भरी दोपहर
और वो भी
एक ढाबे वाली का
मन बहलाने
सोचा न था,
वो भी
बीस साल पुराने
ब्लैक एंड वाइट टीवी में,
अद्भुत!

Sunday, September 18, 2016

मिथ्या

निशाचर की सुबह
दिवाचर की संध्या,

मानव का सच
किस किस की मिथ्या।

स्केच

ये सारी दुनिया
कहीं
एक स्केच ही तो नहीं,

नासमझ पछतावे
फैली स्याही,
और भय
मिटाने की
रबड़ तो नहीं,

किसके हाथ है
पेंसिल
दिखे तो,
कहीं
मैं भी तो
लकीरों में
एक लकीर तो नहीं!